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सात बहनें

mursaleen fatma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमारे घर से कुछ दूर सात बहनें रहती हैं,
        
                                                    
                            
हर भगिनी अपनी अलग कहानी कहती हैं।
उनका घर यहाँ से कुछ ही दूर है,
पूरा उत्तर-पूर्व उनका भरपूर नूर है।

पहली बहन – असम

हम जा नहीं पाते, पर वे हमें चाय पिलाती हैं,
अपने स्नेह से हर अतिथि का मन हर ले जाती हैं।
उनके आँगन में एक-सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं,
काजीरंगा के वन पूरे विश्व में सराहे जाते हैं।
चाय की महक से उनका आँगन सजा है,
ब्रह्मपुत्र का अस्तित्व उनकी विरासत में बसा है।

दूसरी बहन – अरुणाचल प्रदेश

दूजी बहन अपनी कुदरत से सबको लुभाती है,
पर्वत, घाटियाँ और हरियाली के दृश्य दिखाती है।
सुबह सूरज की पहली किरण इन्हीं को जगाती है,
इसी कारण इसे "उगते सूरज की भूमि" कहा जाता है।
अपने बौद्ध मठों के लिए यह जानी जाती है,
दूर-दूर से पर्यटकों को अपनी ओर बुलाती है।
इसके सुंदर हस्तशिल्प विश्वभर में प्रसिद्ध हैं,
संस्कृति और प्रकृति यहाँ दोनों ही समृद्ध हैं।

तीसरी बहन – मणिपुर

तीजी बहन के पास तैरता राष्ट्रीय उद्यान है,
लोकटक झील का दुनिया भर में बड़ा सम्मान है।
सिंगदा बाँध अपनी ऊँचाई के लिए जाना जाता है,
कांगला किला मैतेई संस्कृति में पवित्र माना जाता है।
सबसे बड़ी मीठे पानी की झील यहाँ बहती है,
मैरी कॉम जैसी विश्वविजेता इसी धरती पर रहती हैं।
लाई-हराओबा और चेराओबा की लोक परंपराएँ प्रसिद्ध हैं,
इतिहास और संस्कृति के खज़ाने यहाँ समृद्ध हैं।

चौथी बहन – मिज़ोरम

चौथी बहन की सुंदरता झरनों और झीलों में झलकती है,
"पहाड़ों की भूमि" की पहचान सबसे अलग दिखती है।
यहाँ अधिकतर लोग चर्च जाते हैं,
प्रेम और शांति के संदेश फैलाते हैं।
फावंगपुई शिखर "नीले पर्वत" कहलाता है,
प्राकृतिक सौंदर्य से सबका मन लुभाता है।
राज्य संग्रहालय इतिहास और संस्कृति बताता है,
भारत का गीत-पक्षी, ब्लाइथ्स ट्रैगोपैन, यहीं पाया जाता है।

पाँचवीं बहन – मेघालय

पाँचवीं बहन के भीतर अनेक गुफाएँ समाई हैं,
मावलिन्नोंग की स्वच्छता पूरे विश्व को भायी है।
सबसे अधिक मेघ यहीं बरसते हैं,
बादल भी जैसे यहीं आकर बसते हैं।
जीवित जड़ों के पुल प्रकृति ने बनाए हैं,
अनमोल उपहार इस धरती ने सजाए हैं।

छठी बहन – नागालैंड

छठी बहन की पारंपरिक कला, संगीत और रीति-रिवाज़ों का मान है,
सोलह जनजातियों की जीवंत संस्कृति इसकी पहचान है।
रंग-बिरंगे हथकरघे नागाओं की समृद्ध परंपरा दर्शाते हैं,
इसीलिए इसे "त्योहारों की भूमि" भी कहते हैं।
यहाँ अनेक प्रकार के पारंपरिक व्यंजन मिलते हैं,
चूना पत्थर और कच्चे तेल के खनिज भी यहाँ मिलते हैं।

सातवीं बहन – त्रिपुरा

सातवीं बहन की झील के बीच खड़ा नीरमहल अनुपम दृश्य दिखाता है,
माताबाड़ी त्रिपुरा सुंदरी का पावन धाम हर श्रद्धालु का मन हर ले जाता है।
उनाकोटी की प्राचीन शिलाएँ हिंद का अमर इतिहास सुनाती हैं,
जम्पुई की पहाड़ियाँ और संतरे की बाग़ें प्रकृति की मधुर मुस्कान बन जाती हैं।
बाँस, बेंत और हथकरघे की कला त्रिपुरा की पहचान को और निखारती है,
क्वीन पाइनएप्पल और सुगंधित त्रिपुरा चाय इस धरती की मिठास दुनिया तक पहुँचाती है।

सातों बहनें भारत माँ का अनुपम श्रृंगार कहलाती हैं,अपनी संस्कृति, प्रकृति और परंपराओं से विश्व को राह दिखाती हैं।इनकी विविधता में ही भारत की सच्ची पहचान समाई है,
इन्हीं सात बहनों से उत्तर-पूर्व की अद्भुत शान जगमगाई है।
3 महीने पहले
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