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हर बार तेरा इंतज़ार किया

mursaleen fatma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर बार इंतज़ार किया,
        
                                                    
                            
बार-बार इंतज़ार किया।
इस तरह भी, उस तरह भी,
न जाने कितनी बार इंतज़ार किया।

आपकी प्यारी मुस्कान का,
एक नई-सी पहचान का।
एक सच्चे प्यार के एहसास का,
किसी अपने के साथ का।

थोड़ी-सी नज़ाकत का,
एक प्यारी-सी शरारत का।
तेरी हर छोटी-सी गुस्ताख़ी का,
उन सुनहरे लम्हों की मासूम बदमाशी का।

दिल से किया,
जान से किया।
दिल के हर अरमान से किया,
हर एक एहसास के साथ किया।

हर धड़कन तेरा नाम पुकारती रही,
हर दुआ तेरा ही पता पूछती रही।
उम्मीद की लौ कभी बुझने न दी,
तेरे आने की आस कभी छूटने न दी।

वक़्त बदलता रहा, मौसम गुजरते रहे,
हम मगर तेरी राहों में ठहरते रहे।
मोहब्बत की हर रीत निभाई हमने,
ख़ामोशी में भी तुझे ही पुकारा हमने।

इंतज़ार किया... इंतज़ार किया...
हर बार, बस तेरा इंतज़ार किया।
3 महीने पहले
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