आगे बढ़ते रहो
कठिन राह हो पाँव थके हो,
आगे फिर भी बढ़ते रहो।
आँधी आए, संकट छाए,
हिम्मत से तुम चलते रहो ।
ठोकर हर राही को लगती,
हार नहीं पहचान बने ।
मेहनत से जो रिश्ता जोड़े ,
सपनों को उड़ान मिले।
छोटे-छोटे कदम बढ़ाकर,
मंज़िल खुद आ जाएगी।
सच्ची लगन और विश्वास से,
हर मुश्किल झुक जाएगी।
सूरज हर दिन फिर निकलता,
अँधियारा कब तक टिकता है ,
अपने लक्ष्य पर अडिग रहे जो,
सफलता गान वह लिखता है।
कभी ना रुकना, ना घबराना,
हर पल अपना कर्म करो।
विश्वास, साहस, धैर्य के संग,
प्रगति पथ पर बढ़ते रहो ।
-मोहन लाल रेगर