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गुरु होने का गर्व

Muneer Shamee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न सिंहासन चाहिए मुझको,
        
                                                    
                            
न कोई ताज चाहिए,
मेरे विद्यार्थियों की आँखों में
बस विश्वास चाहिए।

किसी के हाथ में किताब हो,
किसी के मन में सपना हो,
हर विद्यार्थी के जीवन में
मेहनत का अपना दीपक हो।

मैं अक्षर-अक्षर जोड़कर
भविष्य लिखना सिखाता हूँ,
हार के बाद भी मुस्कुराकर
फिर आगे बढ़ना सिखाता हूँ।

मेरे शिष्य जब सफल होकर
मेरा नाम कहीं लेते हैं,
उस पल मेरे सारे संघर्ष
खुशियों में बदल जाते हैं।

यही मेरी पहचान है,
यही मेरा सम्मान है—
मैं शिक्षक हूँ, और मेरे लिए
मेरे विद्यार्थी ही मेरा अभिमान हैं।
एक महीने पहले
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