अभी तो उसके स्वप्नों की राह बाकी है,
अभी उसकी उड़ान की पराकाष्ठा बाकी है।
वह ज्ञान के दीप से अपना पथ आलोकित कर रही है,
अपने अस्तित्व की नई परिभाषा गढ़ रही है।
उसकी आँखों में जो अदम्य अभिलाषाएँ पल रही हैं,
वे एक दिन उसके स्वावलंबन का शिखर बनेंगी।
वह किसी के सहारे की मोहताज नहीं,
अपने संकल्प और सामर्थ्य से अपना मुकाम रचेगी।