विज्ञापन

पावस / सावन

Mukesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सावन की ठंडी फुहार ।
        
                                                    
                            
खुशियां लाई अपार ।।
नृत्य करे मन मयूर ।
कोयल गीत गाए मधुर ।।

नभ में काली घटा छाई ।
हृदय विरहन के उदासी लाई ।।
प्रीतम की याद घनी आई ।
शीतल बयार बहे सुखदाई ।।

धरती की बुझी प्यास ।
सूखे कंठ मिला अमृतरस।।
जागी एक नई आस ।
सुखमय हुई पावस ।।
- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all