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मोह माया है

Mukesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन तू क्यों संसार में उलझा, सब कुछ क्षणभंगुर है,
        
                                                    
                            
जिसको अपना मान रहा है, वह भी तृष्णा का साथी है।
कर्म कर, पर फल का मोह न कर, यही पुरखों ने बतलाया है;
जीवन केवल साँस नहीं है, यह एक मोह और माया है।
जो भी इसमें गोते खाते, प्रेम रोग में डूब जाते है,
न जाने बिन बतलाए, कहा पल भर में खो जाते है।
क्यो इतना इंतजार करे तू, कोन अपना और पराया है।
मतलब के है सब साथी, क्यो समझ नहीं पाता है,
जग ने प्यार सीखाया जिसको, वह जग ठुकराया जाता है ।।
मान ले अब कहना तू क्यो उलझा बैठा है
राम की कृपा होगी तुझ पर छोड़ दे सब यह मोह माया है 
2 घंटे पहले
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