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ममता का आंचल

Mrityunjay tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रेलवे स्टेशन के किनारे, बेसुध माँ का निर्जीव शव पड़ा था,
        
                                                    
                            
भूख से बिलखता, बच्चा, माँ का दूध पीने में लगा था।

अज्ञानता की गोद में,बच्चा माँ की मौत से अनजान था,
अपनी भूख मिटाने को, माँ के आँचल में परेशान था।

माँ की आँखों में, न कोई सपना, न कोई आस बची थी,
उसके सूखे होठों पर, जिंदगी की प्यास जगी थी।

वो बच्चा, बेबस, लाचार, माँ के सीने से लिपटा था,
उसे क्या पता था, अब माँ का साथ छूट चुका था।

रेलवे स्टेशन का शोर, लोगों की भीड़, अनजानी निगाहें,
बच्चे की चीखें, माँ की खामोशी, सब अनसुनी आहें,

वो बच्चा, भूख से तड़पता, माँ के आँचल में छुप गया,
उसे क्या पता था, उसकी माँ का साया अब उठ गया।

भूखे बच्चे की चीख से गमगीन हो उठी हवा,
"मलंग" सोचता भूख ना लगे काश हो ऐसी दवा।।
11 महीने पहले
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