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क्या मुझे मेरा बचपन दोबारा मिलेगा?

Mona Sikder

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब लगता है बड़ी होने लगी हूँ,
        
                                                    
                            
ज़िंदगी के हर रंग पहचानने लगी हूँ।
कौन क्या है _
जबसे बड़ी होती गई,
खुद के लिए ही भारी होती गई।
सबसे अनजान थी,
अब सब कुछ समझने लगी हूँ,
अब लगता है सच में बड़ी होने लगी हूँ।
हर छोटी बात अब बड़ी लगने लगी है,
अब इस दुनिया के रंग फीके से लगने लगे हैं।
हर खुशी बेज़ान सी लगने लगी है,
हर अपनों का रंग बदलने लगा है।
अब लगता है बड़ी होने लगी हूँ,
मन की हर बात अब जुबां पर अटकने लगी है।
मन का हल या जीवन का हल,
सुलझाने के बजाय और उलझने लगा है।
मन में अब डर सा माहौल है _
क्या मुझे मेरा बचपन दोबारा मिलेगा?

 
3 महीने पहले
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