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जिंदगी उल्फतों में मेरी कट गई

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिंदगी उल्फतों में मेरी कट गई
        
                                                    
                            
जिसको चाहा था मुझको मिला ही नहीं

मेरी किस्मत मुझे तो दगा दे गई
सोचता था मैं क्या वह सजा दे गई

नहीं कोई शिकायत है ऐ जिंदगी
रहे खुश तू हमेशा मेरी जिंदगी

मेरा तुझ पर भरम था बेरहम हो गई
जिंदगी मुझसे क्यों बे करम हो गई

तेरा इतना कहर दिल पर अच्छा नहीं
मेरा पागल जिगर एक खिलौना नही

जा तू जैसे रहे मुझको परवाह नहीं
ये मेरी ज़िन्दगी कोई अफवाह नही

ना मिला दिल्लगी का मुझे कुछ सिला
मेरे अल्लाह मुझे अपनी पनाहो मे बुला

मैं उसे माफ़ करके चला जाऊंगा
चाह कर भी नहीं लौट अब पाऊंगा


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