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तूफान

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करता है अट्ठाहस
        
                                                    
                            
तूफान धरती पर
बंगाल रो रहा है
उत्कल है भयभीत
प्रकृति के शक्ति के आगे
नहीं चलती कोई नीति
हृदय विदारक घटना से

होता मन भयभीत
हो कैसे इसका समाधान
हो कैसी इसकी नीति
जान बचे जनमानस का
हर सुविधा अंगीकृत
ईश्वर की महिमा पूरी अपरम्पार
चाहे तो वह कर दे सबका ही कल्याण

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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