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जब आत्मा का शरीर से मन मुटाव हो जाता है

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब आत्मा का शरीर से मन मुटाव हो जाता है
        
                                                    
                            
जीवन का मौत से फिर मिलन सफल हो जाता है

जीवन की सच्चाई है ये जो आया है वो जायेगा
पर असमय ही जाने से मन चिंतित हो जाता है

जो धरती से जाते हैं जल्दी जीवन का अवसान कर
सपनों मे तड़पाते हैं य़ादों का इंसान बन

मत कर जीवन का बलिदान अपने बहुत तड़पते हैं
अपनो के तू साथ ही रह , निर्मल मन फड़कते हैं

ईश्वर मारे तो ही अच्छा , खुद अपना काम तमाम ना कर
तकलीफों पर जीत कर बन्दे अपना जीवन महान कर

तनाव मन मे आने ना दे, अपनो से बातें किया करो
आत्म मन्थन किया करो अपनो के संग जीया करो


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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