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जब आत्मा का शरीर से मन मुटाव हो जाता है

                
                                                         
                            जब आत्मा का शरीर से मन मुटाव हो जाता है
                                                                 
                            
जीवन का मौत से फिर मिलन सफल हो जाता है

जीवन की सच्चाई है ये जो आया है वो जायेगा
पर असमय ही जाने से मन चिंतित हो जाता है

जो धरती से जाते हैं जल्दी जीवन का अवसान कर
सपनों मे तड़पाते हैं य़ादों का इंसान बन

मत कर जीवन का बलिदान अपने बहुत तड़पते हैं
अपनो के तू साथ ही रह , निर्मल मन फड़कते हैं

ईश्वर मारे तो ही अच्छा , खुद अपना काम तमाम ना कर
तकलीफों पर जीत कर बन्दे अपना जीवन महान कर

तनाव मन मे आने ना दे, अपनो से बातें किया करो
आत्म मन्थन किया करो अपनो के संग जीया करो


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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