विज्ञापन

हाड मांस का पुतला

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हांड मांस का पुतला है तु , तेरी क्या औकात यहाँ
        
                                                    
                            
तू मजदूर है बात जान ले वरना बहुत पछतायेगा

तेरा काम हैं मेहनत करना , ना की कुछ मुंह से कहना
शांत रह, काम कर , अब घर ना तू जा पायेगा

मजदूरों की लाशें आज कटी रेल की पटरी पर
अभी समय है बात समझ ले ,वरना भूखा मारा जायेगा

नेताओं को बस चिंता है आज यहाँ मधुशाला की
मदिरा पीके भूल गए ये काम क्या कर पायेगा

मजदूरी की सबको पड़ी है ना तेरे मजबूरी की
भूल जा परिवार को अपने , अब ट्रैन नहीं चल पायेगी

तस्वीर

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile

Junaid Ahmad

5 कविताएं

View Profile

Sooba Lal

1 कविता

View Profile

RAY SINGH CHARAN

13 कविताएं

View Profile