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दर्द बढ़ता है

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दर्द बढ़ता है तो फिर
        
                                                    
                            
उसको बढ़ाना चाहिए
हो बहुत तकलीफ तो
फिर मुस्कुराना चाहिए
मुश्किलों से घबरा मत
तुझे मुश्किलें ज़ितवायेंगी
राह में आगे कदम
आगे बढ़ाना चाहिए
प्यार से बचो ज़रा
प्यार में तकलीफ है
जो प्यार हो गया है तो
दिल से निभाना चाहिए
है अगर कूवत तुममे
तो आसमान जीत लो
इरादे तेरे नेक और
मजबूत होने चाहिए
इश्क में सूरत नहीं
सीरत सनम का देखिये
दिल से दिल मिला हो तो
हरकत भी मिलनी चाहिए

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

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5 वर्ष पहले
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