तेरे हिज्र के बाद मुस्कुराना छोड़ दिया
दिल ऐसे टूटा कि दिल लगाना छोड़ दिया
मैं नहीं छोड़ पाया तेरी मुफ़ारक़त का ग़म
लेकिन इस ग़म में मैं ने ज़माना छोड़ दिया
दुनियाँ हम को आवारा समझती है इसलिए
तेरी गलियों में आना-जाना छोड़ दिया
लोग आज़माते होंगे मोहब्बत को हर दम
लेकिन इश्क़ में हम ने आज़माना छोड़ दिया
तू हुस्न-ओ-शबाब का है एक बे-नज़ीर नज़ीर
तुझ को देख कर ख़ुदा ने मो'जिज़ाना छोड़ दिया
यहाँ तो मुस्कुराने की भी सज़ाएँ मिलती हैं
बस इसलिए हम ने रंज-ओ-ग़म छुपाना छोड़ दिया
सिर्फ़ तेरे कहने पर तुझ से बिछड़ा हूँ मैं
वर्ना मैं ने सब सुनना-सुनाना छोड़ दिया
तीरगी मुसलसल यूँ बढ़ती जा रही है 'मिलन'
कि चराग़-ए-दिल ने भी जगमगाना छोड़ दिया