विज्ञापन

रुख (दिशा परिवर्तन)

Meera patel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घनघोर घटाएं जो बरसने को थी
        
                                                    
                            
हवा संग ले गई
प्यासी धरती तो प्यासी रही
समन्दर में बरसात हो गई
रुख बदल हवा ओझल हो गई
भटक गया बादल जमीं बंजर हो गई
एक आजाद पंछी घर छोड़ कर गया
ठिकाना तो मिला नहीं दर बदर हो गया
मैं पूछती हूं उससे भटकता क्यों है
अपने घर से बेघर होता क्यों है
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all