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प्रेम (गज़ल)

Meera patel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रेम को मारने शहंशाह चला तलबार से
        
                                                    
                            
पर प्रेम कब मरा औजार से

कईयों को शूलि चढ़ा दिया उसने
सफल न हो सका तो खामोश कर दिया उसने

प्रेम कभी मरता नहीं जिंदा ही दफन होता है
लोगों ने समझा ही नहीं प्रेम क्या होता है

प्रेम प्रकाश पुंज ऊर्जा का उमंग तरंग लिये
मिलता है नसीब से जीवन के लिए
3 महीने पहले
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