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कामकाजी महिला

Meenakshi Jain

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घड़ी के घड़ी के अलार्म की ट्रिन ट्रिन....
        
                                                    
                            
सुबह की मीठी नींद की हुई दुश्मन...
बिस्तर से उठ सरपट दौड़ती...
सुबह की सैर/व्यायाम को कभी ना छोड़ती...
जूते के फीते खोले बिना..
गैस पर सबके लिए चाय चढ़ा..
किचन से कमरे में सरपट दौड़कर..
पति, बच्चों,मां-बाबूजी को नाश्ता सर्व कर...
किचन के प्लेटफार्म पर ही चाय सुडकती हुई.....
दो हाथों से दस हाथों का काम करती हुई ...
झटपट लंच बना टिफिन पैक कर देती है...
टिफिन में खाना ही नहीं प्रेम, परवाह और हौसला भर देती है...
स्वयं को कार्यालय जाने के अनुरूप संवारकर...
जब यह कामकाजी महिला घर से निकलती है....
तब संतुष्टि एवं आत्मविश्वास की मुस्कान चेहरे पर खिलती है ...
समय प्रबंधन से, समय को मुट्ठी में भरकर...
जब यह सहज,सरल ग्रहणी ऑफिस की डेस्क पर..
अपने साथियों/सहयोगियों से प्रतिस्पर्धा सी करती है...
बहुधा हर स्पर्धा में आगे ही रहती है....
दर्प और अभिमान इसे छूता भी नहीं है...
दोहरी जिम्मेदारी की तनिक शिकन भी नहीं है...
दैनिक कार्यों में समय प्रबंधन की सीख देती हुई....
ये महिलाएं इत्मीनान से जिंदगी भरपूर जीती हुई...
मेरा रोम रोम इनके सामने नतमस्तक है..
देश की अर्थ व्यवस्था में इनका वरद हस्त है .....वरद हस्त है....
2 वर्ष पहले
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