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ग़ज़ल

Meena Bhatt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिट्टी मिलती जनाब मिट्टी में
        
                                                    
                            
दफ़्न सारे नवाब मिट्टी में

जब भी डाला है आब मिट्टी में
खिलता देखा गुलाब मिट्टी में

ज़िंदा हैं ख़्वाहिशें अभी सारी
रोज़ उठते हुबाब मिट्टी में

रूह रुख़सत हुई है अब देखो
जिस्म होता तुराब मिट्टी में

मिल गयी आज देख लो तुम भी
ज़ीस्त की यह किताब मिट्टी में

ख़त्म सारा विसाल का किस्सा
रोते हम बेहिसाब मिट्टी में

रोज़ चूमें वतन की मिट्टी को
प्यार है लाजवाब मिट्टी में

नाज़ मुमताज़ को भी था जिसपे
मिल गया वो शबाब मिट्टी में

नम हुई आँखे देख मीना की
जब मिला कोई ख़्वाब मिट्टी में
-मीना भट्ट 
2 वर्ष पहले
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