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रात और उम्मीद

mayank vajpeyee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रात कितनी भी स्याह खड़ी क्यों ना हो
        
                                                    
                            
सितारों को कभी अँधेरे से डरते देखा है क्या
क्या हुआ , मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों ना हों
उम्मीद को हालातों से कभी पिछड़ते देखा है क्या
3 महीने पहले
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