याद है मुझे वो तारीख़,
सड़कों पर बेख़ौफ़ घूमते कुत्ते,
वो बारूद की गंध
और गोलियों की आवाज़,
ख़ून से सने सीएसटी पर
पड़ी निर्दोषों की लाशें,
लियोपोल्ड, नरीमन
और कामा हाॅस्पिटल की वो चीखें,
तबाही का वो मंज़र,
जलता हुआ होटल ताज।
कुछ नहीं भूला हूँ मैं,
नहीं भूला हूँ वो 60 घंटे,
जब पाक की नापाक पैदाइशें,
मुंबई की सड़कों पर
नंगा नाच नाच रही थी,
और उतारे जा रही थी
मासूमों को मौत के घाट।
कभी भूल नहीं सकता,
शहीद तुकाराम की बहादुरी,
हेमंत करकरे, अशोक कामटे,
विजय सालस्कर, संदीप उन्नीकृष्णन
जैसे वीरों का साहस,
जो खड़े थे सीना तानें
मौत के आगे,
दे रहे थे जांबाज़ी से
दहशतगर्दों को करारा जवाब।
कैसे भूल सकता हूँ,
वो खौफ़नाक मंज़र,
आमची मुंबई का दर्द,
उन वीरों की शहादत,
वो 26/11,
जब हर आँख हुई थी नम।
याद है मुझे वो 26-11..
मौसम कुमरावत
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