विज्ञापन

ब्रज की गलियों में मचा है शोर आज

MASUM KHAN

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भादों की अष्टमी है कारी-अँधियारी रात,
        
                                                    
                            
काँप उठा कंस होकर भय से निढाल

ब्रज की गलियों में मचा है शोर आज,
यशोदा के आँगन में पधारे हैं नंदलाल

यमुना की धार लगाए गोवर्द्धन को पार‚
मुरली की तानों से करे वो मन पे वार

गोकुल की गलियों में जो करे हैं नादानी,
राधा भी हुई बस उसी श्याम की दीवानी

पनघट पे आए गोपियों की वो मटकी फोड़े,
नटखट है ऐसा कि हर दिल से नाता जोड़े

छलिया वो ऐसा कि हर दिल को चुराए,
बंसी बजाकर झूमे और सबको नचाए
-मासूम खान
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all