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सफ़र के बाद

Masroor Alam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने किरदार पे वो गौर कभी करते नहीं
        
                                                    
                            
मेरे किरदार पे बोहतान लगाने वाले

अपनी फितरत का तमाशा ही करेंगे आखिर
मुझको नीचा यहाँ महफिल में दिखाने वाले

जिनकी आँखों में खटकता है उजाला मेरा
मेरे साये से भी डरते हैं डराने वाले

वक्त की गर्द में खुद अपनी जगह ढूँढेंगे
नाम मेरा यहाँ दुनिया से मिटाने वाले

सिर्फ लफ्जों से मोहब्बत का जो दम भरते हैं
काम आते नहीं ये रस्म निभाने वाले

अपनी ज़द में ये खुद अपनी ही हवा लाएंगे
खाक हो जाएंगे ये दिल को जलाने वाले

खौफ सूरज का अंधेरों से नहीं मिट सकता
हार मानेंगे ये सच्चाई छुपाने वाले

सच तो आलम की ज़बाँ बोलेगी हर हाल यहाँ
थक के सो जाएंगे सब शोर मचाने वाले

 
8 महीने पहले
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