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बेटी

Mansi Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़माने से लड़ने को
        
                                                    
                            
हर वक़्त सक्षम रहती थी,
बात भी बड़ी बेबाकी से
और सीधे मुँह पर कहती थी,
सफलताओं को सीढ़ी चढ़ते हुए
हर बार जीत हासिल करती थी,
बड़ी हो गई सोच कर हाथ पीले कर दिए
बहू मेरी अच्छी है ऐसे कह तारीफ़ होती थी,
कोख में ही मार दिया उस अजन्मे मासूम को
और हर रोज घर में किलकारी गूँजे इसकी चाह थी,
जन्म नहीं लेने दिया ना देखने दी दुनिया ये निराली सी
मार दिया उसको क्योंकि उसका बेटी होना ही गलती थी....

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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