हम तो तुम्हरे दुवार मोरे साईं, खुदही को बिसार दिये।
तोरे चरणन के धूल से नाथा, यही जीवन सँवार लिये।।
अंतरा - १:
जगत के मेले, जगत के रिश्ते, क्षण भर के ये साथी,
सांचों सहारा तुम ही, तुम बिन कऊन हमरा नाथ जी।
तोरे नाम की जोती जलाकर, मन के अँधियार लिये,
हम तो तुम्हरे दुवार मोरे साईं,खुदही को बिसार दिये॥
अंतरा - २:
टूटे सपने रूठी आकांक्षा, हताश हमरी तोहरे हवाले,
तुहरी किरपा से सूखे जीवन, जगजग भईल उजाले।
तुहरी करुणा की गंगा में, मैने सगरी पाप उतार लिये,
हम तो तुम्हरे दुवार मोरे साईं,खुदही को बिसार दिये॥
अंतरा - ३:
न धन मांगू न यश मांगू, न जगत का कोइये सम्मान,
बस इतना वरदान दई देना, रहे अधरों पर तेरा नाम।
तोहरी भगती के मोती चुन कर,जीवन सिंगार किये,
हम तो तुम्हरे दुवार मोरे साईं,खुदही को बिसार दिये॥
समापन:
जब तक साँसें चलती जायें, नित तोरा ही गुन गाऊँ,
आखिर वखत भी तोरे चरनों में,मुक्ति का पथ पाऊँ।
तुहरी शरण में आईके साईं, कष्टन हंसके पार किये।
हम तो तुम्हरे दुवार मोरे साईं,खुदही को बिसार दिये।।