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यथार्थ

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            असीम सागर तल सा
        
                                                    
                            
अनंत नभ के क्षितिज सा
समीर की विरलता लिए
यथार्थ खड़ा जीवन के तट
समर में युधिष्ठिर सा
नहीं कुछ भी , है अवघट
यदि कर लो एक प्रण
साध्य जायेगा तो जायेगा कहां?
उत्कट अभिलाषा के समक्ष
हो जायेगा नतमस्तक।।

।। मनोज सिन्हा।।
 
2 वर्ष पहले
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