दुनिया की विरासतों में
अपनी विरासत प्यारी है
श्रीराम-हरि की धरती पर
आदिकाल से चल रही
वसुधैव-कुटुंबकम की परंपरा
हिंदुस्तान की कह रही कहानी है
ऋषि-मुनियों के देश में
बहती है गंगा-जमुना
यह विरासत पुरानी है
पाया है, हमने सारा-कुछ
संस्कार और संस्कृति अनूठे से
है, ये मिसाल जग में
सानी नही इसका विश्व में
यही बात हमारी निराली है
जीवन से मरण तक
जीता है, भारतवंशी
यह परंपरा सदियों पुरानी है
आकर्षित करता है, भारत
सम्पूर्ण विश्व सदन को
काशी-मथुरा की धरती
यही संस्कृति हमारी निराली है
विरासत से ही पाकर ज्ञान
जा पहुंचे हैं, हम चांद की धरा पर
कृति पताका हमें और फहरानी है
विरासत से ही पाया हमने सारा
भारत बना है, आज !!
विश्व में राष्ट्र महान।।
-मनोज सिन्हा