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सुनहरी यादें

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जुड़ता चला गया
        
                                                    
                            
अंश दर अंश
आता गया, यादों में
बीते यादों के
पथ का प्रसंग।।

थे,सारे
बीते संस्मरण
बचपन ,छुटपन के
यादगार स्मरण
छूते हैं, आज भी मेरे
हृदय के कोरों को
गुदगुदाते वे अद्भुत क्षण
भूलते-भागते वे अमर पल।।

जब तुम आते थे,मेरे घर
पहले पढ़ाई के लिए
फिर खेलने
फिर घूमने यायावर की तरह।।

तब भविष्य की
कामना बिलकुल नहीं थी
बीतता था ,समय
बेपरवाह ,मदमस्त, मौज में
निर्दोष सा, भोला सा
हमारा मन
बीते जीवन के अध्यायों का
मधुर, मोती सा
वह बीता क्षण और सुमधुर क्षण के
साथ गुजरा वह अद्भुत पल
मेरी बीती यादों का वह पथ
मेरी बीती यादों का वह पथ।।

- मनोज सिन्हा
2 वर्ष पहले
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