आशा की प्रथम किरणों से
निखरा व्यक्तित्व का पथ
लक्ष्य साध, संकल्प ले
चल पड़ा लक्ष्य को पाने
ज्योत अभिलाषा का जला कर मन में
असंभव कुछ नहीं पाना जग में
पर, रहे सदा यह ध्यान
प्राण जाए पर, न जाए प्रण मन से
व्यक्तित्व को मिल सम्मान सदा जग में।।
।। मनोज सिन्हा।।