समिधा बन कर
जल रहा हूं,आज भी
क्या हवन ! शेष है अभी।।
है, यदि तो
कर दो
एक एक कर होम
धर्म के अग्नि- कुंड में
अहंकार, दंभ
दिखावे का मान
धारणा और घमंड।।
दुर्गुणों को कर होम
बो दो, मन के खेत में
स्नेह, प्रेम प्रीत और प्रीति
और
मर्यादा के बीज समुन्नत
फलित होंगें, वे वृक्ष बन
दे सकेंगे सार्वभौमिक
शीतल छाया सघन ।।
- मनोज सिन्हा