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प्रश्नोत्तर

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            श्रद्धा को अर्पित कर
        
                                                    
                            
तेरे हृदय से पूछता है, मन
क्या? तुझमें भी उत्पन्न
होती है, श्रद्धा का समभाव
जीवन के पथ क्रम?
मुखर होते हो या मौन
प्रखर होते हो या निस्तेज
यह पक्ष तेरा है, तू ही जाने
मैं तो जानूं अपनी श्रद्धा - समग्र
मैं तो जानूं, अपनी श्रद्धा -समग्र।।

-  मनोज सिन्हा
2 वर्ष पहले
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