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प्रेरणा

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरी लेखनी से
        
                                                    
                            
सृजित हो रोज कोई
नादान सी कल्पना
हो जिसमें सुस्मित स्नेह और प्रीत
मिलने को जी चाहे ह्रदय से
अगन उठे धीर-गंभीर
हो प्रेम की वसुंधरा पर कुछ ऐसा
आस्था और विश्वास का होता रहे मिलन
छंटता रहे अनास्था का धुंध
विरह में भी हो मिलन का अहसास
प्रेम ,प्रीत, प्रणय संगीत हो परिपूर्ण।।
3 वर्ष पहले
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