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प्रेम पाश

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काश! तुम्हें बांध पाता
        
                                                    
                            
प्रेम पाश के बंधों में
तुम दूर बसे हो
नील निलय के स्पंदन में
चिर काल से मैं
बाट जोह रही
आहट के गुंजन में
काश! आ जाते एक बार
मेरे द्वार से हो
मेरे घर के आंगन में
कुसमित हो जाता
मेरे हृदय का आंगन
आ जाते जो तुम एक बार
मेरे द्वार
पा जाता मैं
जीवन में
चिर मिलन का अलंकार
चिर मिलन का अलंकार।।
- मनोज सिन्हा
एक वर्ष पहले
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