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प्रार्थना

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भूमंडल में सर्वव्याप्त
        
                                                    
                            
अदृश्य किंतु ज्ञात
करता हूं, नित्य नमन
हे! देव, देवी ,कुल देवी
तेरे चरणों में अर्पित है
अंतर्मन से समग्र श्रद्धा -सुमन ।।

भूमंडल में सर्वव्याप्त
अदृश्य किंतु ज्ञात।
अछूता नहीं तुझसे
व्योम और पाताल
जितना ऊंचा ,उतना गहरा
है , तुम्हारा अस्तित्व विद्यमान
तुम लघु में हो विशाल
तेरी माया जाने क्या संसार
हम तो हैं, मानव अज्ञानी
यदि करते हैं , कभी नादानी
छमा करना मेरे इष्ट ,मेरे देव - देवी
हम नहीं हैं, अभिमानी
हम नहीं हैं , अभिमानी।।

भूमंडल में सर्वयाप्त
अदृश्य किंतु ज्ञात।।

जब भी आता है,संकट कभी
तुम ही सुमिरन में आते हो
शरणागत जैसे ही कोई तेरे पास
होता है, फौरन कष्ट उसका दूर हो जाता है
तुम हो आलंब -आधार
मेरे समस्त जीवन के प्रसंगों का
प्रभु मार्गदर्शित करना मेरे बोध को
सुबोध में रहूं ,सदा मैं
देना आशीष सदा तुम
पल- पल जीवन के संग
हो सानिध्य तुम्हारा, अमर अचर
मुझे संज्ञान रहे कर्तव्य अपना
तेरी चरणों में सदा रहूं, यही है
अंतर्मन की मेरी अभिलाषा सदा।।
मां दुर्गे के चरणों में
समर्पित सारे भाव- बोध।।
- मनोज सिन्हा
2 वर्ष पहले
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