विज्ञापन

प्रभु के द्वार

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सप्त राग
        
                                                    
                            
सप्त भाव
सप्त तारों सा
मन के नभ पर
सप्त रंगों में सजता
इंद्रधनुष सा बारंबार
जब जब होता प्रभु वंदन
प्रभु के द्वार!
खुलता जाता
द्वार मन का मन से
होता जाता सर्वकल्याण
हे! हरि
प्रशस्त करना तुम
जीवन का दुर्दम्य राह
देना मोक्ष मुक्ति का ज्ञान
देना मोक्ष मुक्ति का दान।।

-मनोज सिन्हा
 
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Awasthi

3 कविताएं

View Profile

Milan Thakur

5 कविताएं

View Profile