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मिट्टी

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घर
        
                                                    
                            
घड़ा
संपदा
जीवन के
सारे प्रसंग
आए मिट्टी से
मिट्टी है, सोना
बिन मिट्टी
क्या होगा जीना?

विविधता मिट्टी की
पूछो मिट्टी से ही
कैसे बसते है?
विविध- विविध
रंग तुझमें
लाल - पीली- काली - उजली
वस्त्रों में मनमोहक , सुंदर
लगती हो, कहते हैं, तुम्हें लोग
नीला ग्रह, नीले कहां दिखते हो
कुछ- कुछ किवदंती सी तुम लगती हो ।।

तुम स्वयं में हो पूर्ण
अर्थ, अभिप्राय ,भावार्थ
बसते हैं सभी, तुझमें
तुम हो तो इस जीवन की
कल्पना संभव है
अन्यथा सारा तत्व कल्पनातीत होगा।।
- मनोज सिन्हा
2 वर्ष पहले
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