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मन का संशय

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब हो अंधेरा भरा
        
                                                    
                            
राह सुझे न दिवस में
तब मन के नैनों से
देखना तुम दूर अनंत में
देखना तुम दूर अनंत में।।

मिल जायेगा पथ तुम्हें
खुल जाएंगी राहें अनेक
धीर रख बस चलना तुम
पा जाओगे इच्छित फल
अवश्य निकट भविष्य में
अवश्य निकट भविष्य में।।

लेकिन यह संभव होगा
द्वंद्वों से घिर जाएंगे
जो वीर बढ़ेंगे लक्ष्य के पथ में
लेकिन, द्वंद विचारों के होगें
क्षणभंगुर मेघ- नीर से
छा कर , बरस कर
हो जाएंगे दूर हमसे
स्थावर बस रहना होगा
दृढ़ हो निर्णय लेना होगा
प्रभु! श्रीराम दिखाएंगे हमें मार्ग
बस उस राह पे हमें चलना होगा
बस उस राह पे हमें चलना होगा।।

- मनोज सिन्हा
एक वर्ष पहले
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