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मैं कविता हूं

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं कविता हूं
        
                                                    
                            
सरिता सी नित्य बहती हूं
बह कर कल कल छल छल अनुनादों से
गीत जीवन की गाती हूं
मुझे नहीं आता रुक जाना
अपना मार्ग स्वयं बनाती हूं
मैं हूं , सदानीरा
सदा पोषित वसुंधरा को करती हूं
शब्दों की धारा बन
कविता में ढ़ल
सरिता सी बहती हूं
चाह नहीं है, मुझे तुमसे कुछ पा जाना
मैं तो कविता हूं , हृदय के सारे भाव
शब्द गीतों में रच तुम्हें सदा सुनाती हूं
शब्द गीतों में रच सदा तुम्हें सुनाती हूं।।
-मनोज सिन्हा
एक वर्ष पहले
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