विज्ञापन

मधुमास

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मधुमास
        
                                                    
                            
-----------
सुखा बुझा रहा
जीवन का श्रृंगार
आया नहीं मधुमास
बैरन रैन पतझड़ का
ले गया खुशियों के
हरे पत्ते, छोड़ गया
गहरा अवसाद
हृदय में
आया नहीं मधुमास
उदास रहा
जीवन का श्रृंगार
बसंत की आस में
वीरान वृक्ष सा
सौंदर्य विहीन
होता जा रहा
कब आओगे?
एक तिथि
बतला दो
प्रतीक्षारत हैं
मेरे दो नयन
हृदय में
संजो कर
तुम्हारी याद
आया नहीं मधुमास
उदास है
जीवन का श्रृंगार।

- मनोज सिन्हा
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Awasthi

3 कविताएं

View Profile

Milan Thakur

5 कविताएं

View Profile