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जिजीविषा

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दुख के छा जाने से
        
                                                    
                            
सपनों के खो जाने से
टूटा नहीं करता, जीवन तो जीवन है
प्रवाह नद-जल सा
क्या वृक्ष, क्या जीव
सबमें है, जिजीविषा का, अदम्य रूप
जीता है, वो संघर्षों में
उबरता है, वह प्रयासों से
उपवन भी सूखता, कहां है?
पतझड़ के आ जाने से
टूट जाता जब, जीवन
तो लहरों पर चलती, नौका कैसे?
लहरें हों, चाहे जितनी ऊंची
जोश होता है, उससे भी ऊंचा
अरमानों पर झंझावात होता नहीं हावी
जब मानव जोर लगाता है
तब पत्थर भी बन जाता है, पानी
तब पत्थर भी बन जाता है, पानी।।
3 वर्ष पहले
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