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हालात के बादल

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुद्दत हुए
        
                                                    
                            
मुलाकातों के
मानों छाए हैं
बादल हालातों पे
कहीं से दिखती नहीं चाहत
होंगी मुरादें कैसे पूरी
मुकम्मल तो कोई नहीं
न दरिया, न समंदर
बेरुखी हो ऐसी तो
जीवन पर छाए रहेंगे
काले काले बादल
छिप जायेगें ,उसमें
आफताब और महताब सभी।
2 वर्ष पहले
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Shivam Awasthi

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