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फ़ुर्क़त

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फ़ुर्क़त में मैं
        
                                                    
                            
तेरे बिना कैसे
जी पाऊँगा?
मत आजमाओ इतना
मैं टूट जाऊंगा
इख़्तियार ख़ुद पे
मैं रखता हूँ
पर पैमाना सब्र का
छलक जाए तो क्या करूँ
तलबगार हूँ, तेरा
और इम्तिहान न लो मेरा॥
3 वर्ष पहले
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