विज्ञापन

द्वंद से मुक्ति

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नहीं चाहिए मुझे
        
                                                    
                            
द्वंदों का हार
मैं आलोकित हुआ हूं
पाकर शिक्षा का ज्ञान
उसका है, मुझे भान
चाहता हूं, निर्बाध स्वतंत्रता
खग _विचरण के समान
किसने देखा है उस योद्धा को
बांधा है, जिसने आसमान
ये दर्प नहीं
नहीं है, कोई अभिमान
मैं तो चाहता हूं
समरस संस्कारों से
जोड़ता रहूं, बिखरे
तिनके जैसे विचारों को
परंतु अक्षुण्ण रखना मेरा स्वाभिमान
देना साहस, भरना भाव
ताकि मैं तोड़ सकूं
द्वंदों के सारे प्रपत्र
ठुकरा सकूं, घृणा के समस्त
गुणधर्म और भेद!!
-मनोज
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Awasthi

3 कविताएं

View Profile

Milan Thakur

5 कविताएं

View Profile