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भावों का परिपेक्ष्य

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नव, नूतन ,नवीन
        
                                                    
                            
उर के अखिल में
लहराए उमंग, खिले प्रसंग
रंगों का विविध
जीवन में ले कर आया बहुविध
स्नेह- भाव , प्रेम- सम्भाव,मंजुल-
सामिप्य
उतर आए हृदय से
कुछ सरल, कुछ गंभीर
बरसे नयन उमड़- घुमड़ कर मेघ से
पिघला सोने सा मन
बिन ऊष्मा, बिन धूप
आई छांव, धीमे पांव
कुछ नूतन, नवीन से
विरह मिलन के अनुक्रम में
वे छोड़ गए जीवन में
मधुर मृदुल यादों की धुंधली तस्वीर।।
-मनोज सिन्हा
 
2 वर्ष पहले
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