विज्ञापन

बहते भावांश

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दो कतरा बह गया
        
                                                    
                            
अल्फ़ाज़ दिल का कह गया
यद्यपि, सुना किसी ने नहीं
क्योंकि! अभिव्यक्ति मौन थी
मौन अभिव्यक्ति समझता भी कौन और क्यूं?
जो था वह, बहुत दूर चला गया
इसलिए भावों का भावांश
आंखों से अविरल बह गया
बहते-बहते कह गया वह
अंतस का समस्त
सुना जिसे किसी ने नहीं
यदि कोई सुन भी लेता
तो वह समझ पाता नहीं
तो वह समझ पाता नही।।
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Awasthi

3 कविताएं

View Profile