दो कतरा बह गया
अल्फ़ाज़ दिल का कह गया
यद्यपि, सुना किसी ने नहीं
क्योंकि! अभिव्यक्ति मौन थी
मौन अभिव्यक्ति समझता भी कौन और क्यूं?
जो था वह, बहुत दूर चला गया
इसलिए भावों का भावांश
आंखों से अविरल बह गया
बहते-बहते कह गया वह
अंतस का समस्त
सुना जिसे किसी ने नहीं
यदि कोई सुन भी लेता
तो वह समझ पाता नहीं
तो वह समझ पाता नही।।