राग विराग
सुर और संगम
बहता था जो
हृदय के अंतस
सूखा कहां कैसे?
विचलित है, भाव
चिंतित है, मन
व्यथा के कथ्य
नहीं बताते अर्थ
सरित प्रवाह
रुका तो कैसे?