मनके की माला
गले का हार
सुशोभित करता तन को
मन को अलंकृत करेगा कौन?
पूछो एक प्रश्न औरों से
करो एक जिरह खुद से भी
परंतु! उत्तर मिलेगा नहीं
उसे ढूंढना होगा
आगे बढकर,मन से
मिल जायेगा वह स्वयं से।।