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वक्त की आँधियों में भी मेरा वज़ूद..

Manoj Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक़्त की आँधियों में भी मेरा वजूद बाकी है,
        
                                                    
                            
टूटकर भी खड़ा हूँ, यही मेरा सुकून बाकी है।।

हर किसी ने मुझे अपनी नज़र से ही परखा है,
मेरे किरदार में लेकिन अभी जुनून बाकी है।।

ज़ख़्म कितने मिले, मुस्कुराहट नहीं खोई मैंने,
मेरी आँखों में जीने का अब भी फ़सून बाकी है।।

राह में ठोकरों ने मुझे और सँवारा है हरदम,
मेरे हौसलों का तो अभी आसमाँ बाकी है ।।

लोग तो मिटाने चले थे मेरी हर एक पहचान,
मेरे लफ़्ज़ों में फिर भी मेरा वजूद बाकी है।।

मैंने सच बोलने की सज़ा उम्र भर पाई मगर,
मेरी आवाज़ में आज भी वही सुकून बाकी है।।

कवि एमके सिंह' झुकना नहीं फ़ितरत में कभी,
सर भले झुक जाए, मगर अपना वजूद बाकी है।।

 
2 महीने पहले
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