तुझ बिन अधूरी हर दुआ,बिन तेरे अधूरी बंदगी,
तेरे बिना ऐ हमनशीं, अधूरी है अपनी ज़िंदगी।।
तेरे ही नाम से महकती है मेरी साँसों की राहें,
वरना तो ख़ामोशियों की एक नगरी है ज़िंदगी।।
चाहा नहीं था दर्द को,लेकिन तेरे बिछड़ने के बाद,
आँसू की हर एक बूँद की तर्जुमानी है ज़िंदगी।।
सदियों का फ़ासला लगे,अब इक पल की जुदाई भी ,
तेरी यादों के कारवाँ की रहगुज़री है ये ज़िंदगी।।
हर मोड़ पर तेरा निशाँ,हर ख़्वाब में तेरा है वजूद,
तेरी मोहब्बत की लिखी इक शायरी है ये ज़िंदगी।।
दुनिया की भीड़ में भी दिल तन्हा-सा रहता है यूँ,
तेरे बिना हर महफ़िल भी वीरानी सी है ज़िंदगी।।
मिल जाए अगर फिर से तू, और कोई चाह न रहे,
तेरे क़दमों की छाँव में ही मेरी ख़ुशी की है ज़िंदगी।।
'एम के सिंह' इतना ही कहना है मेरी हर ग़ज़ल का सार,
तू साथ हो तो जन्नत है, तुझ बिन अधूरी है ज़िंदगी।।
- एम के सिंह